Late Shri Mohan Upreti Ji - स्वर्गीय श्री मोहन उप्रेती जी

Founder Parvatiya Kala Kendra - संस्थापक पर्वतीय कला केंद

Parvatiya Kala Kendra was established on October 17, 1968 as a registered NGO based in Delhi, India to promote Folk Forms, Art & Culture of Uttarakhand. The efforts and dedication of late Shri Mohan Upreti ji & Parvatiya Kala Kendra has put Uttarakhand on the world’s cultural map. Parvatiya Kala Kendra showcases the folk forms of central Himalayan regions of Kumaon & Garhwal associated with the rituals, ceremonies & legends in form of plays(dramas) conprising of songs, dance and ballads tales. The programmes of Parvatiya Kala Kendra are world-renowned and have won many trophies & recognition. Some of the major plays are Rajula Malushahi, Rasik Ramol Ajua Bafaul Ramlila Goriya InderSabha Meghdoot Amir Khusrao.


पार्वती कला केंद्र की स्थापना १७ अक्टूबर, १९६८ स्वर्गीय श्री मोहन उप्रेती जी द्वारा उत्तराखंड की लोक कला और संस्कृति को बढ़ावा दिलाने के उद्देश्य से की गयी थी । स्वर्गीय श्री मोहन उप्रेती जी तथा पार्वती कला केंद्र के प्रयासों और समर्पण के फलस्वरूप आज उत्तराखंड विश्व के सांस्कृतिक मानचित्र पर है । पार्वती कला केंद्र कुमाऊं और गढ़वाल मंडल की लोक कलाएं, रीती-रिवाज़, और किंवदंतियों को नृत्य और मधुर संगीत से सुसज्जित नाटकीय रूपांतरण के रूप में जन-जन में जारूकता फैलाते हुए, उत्तराखंडी विरासत को जीवित रखे हुए है । पार्वती कला केंद्र के कुछ प्रमुख विश्व प्रसिद्ध नाटको में राजूला मलशाही, रसिक रामल अजूआ बाफौल रामलीला गोरी इंद्र सभा मेघदूत अमीर खुसरो शामिल है ।